आधुनिक शिक्षा में सहजयोग ध्यान का महत्व

(The Important of Sahaj yoga Meditation in modern Education)

Authors

  • जीनू मीणा (शोधार्थिनी) शिक्षा शास्त्र विभाग दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर
  • प्रोफेसर लोकेश त्रिपाठी (शिक्षा शास्त्र विभाग) पी.आर.डी.पी.जी. कॉलेज, देवरिया दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर

Keywords:

सहजयोग ध्यान, आधुनिक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य

Abstract

आधुनिक युग छात्रों में पढ़ाई, परीक्षा का भय है, असफल होने की चिंता का दबाव लगातार देखने को मिल रहा है। जिसका असर छात्रों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ रहा हैं। आज की शिक्षा प्रणाली रटने पर केन्द्रित हो गई है। छात्रों के मन में नौकरी ना लगने की चिंता, आक्रोश, गुस्सा, एकाग्रता, की कमी आदि देखने को मिल रही है। पहले शिक्षा का अर्थ छात्रों का चरित्र का विकास करना था, परन्तु आज वह केवल नौकरी एवं नंबरों तक सीमित रह गया है। छात्रों के पास जानकारी तो बहुत हैं पर उन्हें मानसिक शान्ति, एकाग्रता और संतुलन नहीं हैं। छात्रों में मानसिक तनाव को देखते हुए आधुनिक शिक्षा प्रणाली में सहजयोग का महत्व बहुत बढ़ गया हैं। आधुनिक काल की अंधा-धुंध स्थिति में छात्रों का संतुलित विकास करना सहजयोग का विशेष उद्देश्य हैं। सहजयोग के माध्यम से मनुष्य की उस अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं जिसे विचारहीन जागरूकता कहते हैं। इस अवस्था में छात्र अतीत या भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर वर्तमान क्षण का अनुभव करता हैं। सहजयोग ध्यान करने से छात्र शांति और संतुलन को प्राप्त करते हैं तथा समय के साथ छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होने लगता हैं।

References

पुस्तकें -

श्री माताजी निर्मला देवी (1990) सहजयोग: एक परिचय नव शक्ति, प्रकाशन नई दिल्ली।

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शोध पत्रिकाये-

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Published

2026-07-31

How to Cite

जीनू मीणा, & प्रोफेसर लोकेश त्रिपाठी. (2026). आधुनिक शिक्षा में सहजयोग ध्यान का महत्व: (The Important of Sahaj yoga Meditation in modern Education). The Voice of Creative Research, 8(3), 219–223. Retrieved from https://thevoiceofcreativeresearch.com/index.php/vcr/article/view/410

Issue

Section

Research Article