उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण और निराकरण: एक अनुभवजन्य अध्ययन
Keywords:
सड़क दुर्घटना , उत्तर प्रदेश, तकनीक, स्वास्थ्य, अनुभवजन्यAbstract
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है जो सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर समस्या से प्रभावित है। यह अध्ययन राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों की पहचान करता है तथा उनके निराकरण हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करता है। अध्ययन माध्यमिक डेटा पर आधारित है जिसमें मंत्रालय ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज की वार्षिक रिपोर्ट्स, पुलिस रिकॉर्ड तथा अकादमिक अध्ययन शामिल हैं। दो हजार बीस से दो हजार पच्चीस तक के आंकड़ों से स्पष्ट है कि दुर्घटनाओं में निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष दो हजार बाईस में चौवालीस हजार चार सौ तिरासी दुर्घटनाएं दर्ज हुईं जो दो हजार तेईस में बढ़कर छियालीस हजार पांच सौ चौंतीस हो गईं। दो हजार चौबीस में यह संख्या छियालीस हजार बावन तक पहुंची तथा दो हजार पच्चीस में जनवरी से नवंबर तक छियालीस हजार दो सौ तेईस दुर्घटनाएं दर्ज हुईं जिनमें चौबीस हजार सात सौ छिहत्तर से अधिक मौतें हुईं जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। प्रमुख कारणों में अत्यधिक गति से वाहन चलाना लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत मामलों में जिम्मेदार रहा है। इसके अतिरिक्त चालक की थकान, खराब सड़क स्थिति तथा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन भी महत्वपूर्ण हैं। दोपहिया वाहन तथा पैदल यात्री सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं जहां दोपहिया वाहनों से संबंधित दुर्घटनाएं लगभग उनतालीस प्रतिशत हैं।
यह अध्ययन अनुभवजन्य दृष्टिकोण अपनाता है जिसमें आंकड़ों के पैटर्न का विश्लेषण कर निराकरण के उपाय सुझाए गए हैं। इनमें बेहतर सड़क इंजीनियरिंग, सख्त कानूनी प्रवर्तन, जन जागरूकता अभियान तथा तकनीकी हस्तक्षेप जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं। उदाहरणस्वरूप उत्तर प्रदेश पुलिस का डेटा आधारित रोड सेफ्टी मॉडल कुछ क्षेत्रों में दस से पंद्रह प्रतिशत तक कमी लाया है। अध्ययन का उद्देश्य नीति निर्माताओं को साक्ष्य आधारित सिफारिशें प्रदान करना है ताकि आर्थिक तथा सामाजिक प्रभाव कम हो सके। अनुमानित रूप से सड़क दुर्घटनाओं से राज्य को प्रतिवर्ष पचास हजार करोड़ रुपये का नुकसान होता है जिसमें चिकित्सा व्यय उत्पादकता हानि तथा परिवारों पर प्रभाव शामिल है। प्रभावी उपायों से दो हजार तीस तक पचास प्रतिशत कमी संभव है जैसा कि अन्य राज्यों के सफल मॉडलों से प्रमाणित है। यह अध्ययन सड़क सुरक्षा को बहुआयामी समस्या मानकर एकीकृत दृष्टिकोण की वकालत करता है।
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